भारत ने 2030 तक Hepatitis B और C खत्म करने का लक्ष्य दोहराया, सरकार ने बढ़ाई जांच और इलाज की तैयारी

नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026:
भारत ने Hepatitis B और Hepatitis C को वर्ष 2030 तक सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा नहीं रहने देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। स्वास्थ्य सचिव ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में भारत की वायरल हेपेटाइटिस से निपटने की रणनीति पर जानकारी दी।
सरकार के अनुसार, Hepatitis की रोकथाम, स्क्रीनिंग, बीमारी की पहचान और इलाज को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। इसमें गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग, बच्चों के Hepatitis B टीकाकरण, सुरक्षित रक्त संक्रमण और जरूरतमंद मरीजों के लिए जांच व उपचार की सुविधा शामिल है।
Hepatitis B और C क्यों चिंता का विषय हैं?
Hepatitis मुख्य रूप से लीवर को प्रभावित करने वाली बीमारी है। लंबे समय तक रहने वाला Hepatitis B या C लीवर में गंभीर क्षति, सिरोसिस और आगे चलकर लीवर कैंसर का कारण बन सकता है। कई मामलों में शुरुआती चरण में मरीज को कोई स्पष्ट लक्षण भी दिखाई नहीं देते।
इसी वजह से समय पर जांच को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। WHO के अनुसार Hepatitis B के लिए प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध है, जबकि Hepatitis C के लिए आधुनिक उपचार से बीमारी को ठीक किया जा सकता है।
भारत में क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
भारत ने 2018 में National Viral Hepatitis Control Programme (NVHCP) शुरू किया था। इसके तहत Hepatitis की रोकथाम, जांच, इलाज और जागरूकता पर काम किया जा रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, NVHCP के तहत 21 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग, 6 लाख से अधिक मरीजों का इलाज और 1,153 उपचार केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। Hepatitis B की जन्म के समय दी जाने वाली वैक्सीन की कवरेज भी 92% से अधिक बताई गई है।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
जिन लोगों में Hepatitis का जोखिम अधिक हो सकता है, उन्हें डॉक्टर की सलाह पर जांच करवानी चाहिए। विशेष रूप से संक्रमित रक्त के संपर्क, असुरक्षित इंजेक्शन या अनस्टेराइल मेडिकल प्रक्रिया, संक्रमित मां से बच्चे में संक्रमण और अन्य जोखिम वाले मामलों में सावधानी जरूरी है।
लक्षणों को नजरअंदाज न करें
थकान, भूख कम लगना, मतली, पेट में परेशानी, गहरे रंग का पेशाब या आंखों/त्वचा का पीला होना जैसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। हालांकि Hepatitis कई बार बिना लक्षण के भी लंबे समय तक मौजूद रह सकता है।
निष्कर्ष:
भारत का 2030 का लक्ष्य Hepatitis की रोकथाम और इलाज को देशभर में अधिक सुलभ बनाने पर निर्भर करेगा। समय पर जांच, टीकाकरण, सुरक्षित मेडिकल प्रथाएं और सही उपचार इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
